पाठ्यक्रम: GS2/ शासन व्यवस्था एवं राजनीति, जीएस-3/ अर्थव्यवस्था
सन्दर्भ
- व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने तथा भारत को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कराधान तथा अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में प्रस्तुत किया है।
- यह विधेयक भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 तथा वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करेगा।
विधेयक के प्रमुख प्रावधान
सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त आय पर छूट: विधेयक विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) तथा अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस) को निम्नलिखित आय पर आयकर से छूट प्रदान करता है:
- सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से अर्जित ब्याज तथा ऐसी प्रतिभूतियों की बिक्री, विनिमय या अंतरण से प्राप्त पूंजीगत लाभ।
- पहले आयकर अधिनियम के अंतर्गत ब्याज आय पर 20%, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 30% तथा दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5% कर लगाया जाता था।
- विदेशी कंपनियों के लिए कर छूट: अधिसूचित विशेष क्षेत्र में कच्चे हीरों की बिक्री से प्राप्त आय को करमुक्त किया जाएगा। यह छूट कच्चे हीरों के खनन में लगी विदेशी कंपनियों या उनकी साइटहोल्डर कंपनियों तथा कच्चे हीरों की बिक्री से जुड़े दलाल, एग्रीगेटर अथवा निविदा एवं नीलामी इकाइयों पर लागू होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण: सीमा शुल्क बंधित क्षेत्रों (कस्टम्स बॉन्डेड एरिया) में स्थित गोदामों में इलेक्ट्रॉनिक अवयवों के भंडारण से प्राप्त आय, बशर्ते ये अवयव भारतीय अनुबंध विनिर्माताओं को आपूर्ति किए जाएँ, आयकर से मुक्त रहेगी।
- पात्र उत्पादों में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सर्वर तथा उनके उप-संयोजन/अवयव शामिल हैं।
- निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं के भारतीय अनुबंध विनिर्माताओं को पूंजीगत वस्तुएँ, मशीनरी, उपकरण अथवा टूलिंग की आपूर्ति से प्राप्त आय भी आयकर से मुक्त रहेगी।
- भारत के बाहर पंजीकृत लेकिन भारत से प्रबंधित निवेश कोष: आयकर अधिनियम ऐसे पात्र निवेश कोषों के कर उपचार के लिए शर्तें निर्धारित करता है जो भारत के बाहर पंजीकृत हैं, किंतु उनका प्रबंधन भारत से किया जाता है।
- यदि ये शर्तें पूरी होती हैं, तो ऐसे कोष को भारत में व्यावसायिक संबंध रखने वाला नहीं माना जाएगा और इस आधार पर उस पर भारत में कर नहीं लगेगा।
- विधेयक कई शर्तों को समाप्त करता है, जिनमें कम-से-कम 25 सदस्य, किसी एक निवेशक की अधिकतम 10% भागीदारी, 100 करोड़ रुपये की न्यूनतम मासिक औसत कोष राशि तथा किसी एक इकाई में कोष के 25% से अधिक निवेश पर रोक शामिल है।
- व्यावसायिक न्यासों के विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी): वित्त अधिनियम, 2026 रियायती कर दर चुनने वाली प्रत्येक घरेलू कंपनी पर देय आयकर पर 10% अधिभार लगाता है।
- विधेयक व्यावसायिक न्यास के विशेष प्रयोजन साधन के लिए अधिभार की दर बढ़ाकर 25% करता है।
- व्यावसायिक न्यास (जैसे आरईआईटी और इनविट) निवेशकों से धन एकत्र कर परिसंपत्तियों की खरीद एवं प्रबंधन करते हैं। विधेयक ऐसे विशेष प्रयोजन साधन से प्राप्त लाभांश के रूप में मिलने वाली आय पर व्यावसायिक न्यास के यूनिटधारकों को कर से छूट भी प्रदान करता है।
- डेटा केंद्र: आयकर अधिनियम निर्दिष्ट विदेशी कंपनियों को निर्दिष्ट डेटा केंद्रों से सेवाएँ प्राप्त करने से होने वाली आय पर कर छूट देता है। विधेयक निम्नलिखित शर्तों को हटाता है:
- विदेशी कंपनी का केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित होना।
- डेटा केंद्र का किसी अनुमोदित योजना के अंतर्गत स्थापित एवं अधिसूचित होना।
- वर्तमान अधिनियम के अनुसार छूट केवल भारतीय कंपनी के स्वामित्व एवं संचालन वाले डेटा केंद्रों से प्राप्त सेवाओं पर उपलब्ध है।
- विधेयक इस छूट का विस्तार भारतीय कंपनी द्वारा पट्टे पर लेकर संचालित डेटा केंद्रों तक भी करता है।
- डिजिटल भुगतान: विधेयक भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए के अंतर्गत वर्तमान शून्य व्यापारी छूट दर (एमडीआर) के प्रावधान को हटाने का प्रस्ताव करता है।
- व्यापारी छूट दर (एमडीआर) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान लेनदेन के प्रसंस्करण के लिए बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता व्यापारियों से लेते हैं।
- यह सामान्यतः लेनदेन मूल्य के एक छोटे प्रतिशत के रूप में निर्धारित किया जाता है।
- एमडीआर की राशि बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं (पीएसपी), भुगतान गेटवे तथा कार्ड नेटवर्क के बीच साझा की जाती है।
विधेयक का महत्व
- वैश्विक निवेशकों के लिए नीतिगत निश्चितता बढ़ाकर भारत में व्यापार सुगमता में सुधार करेगा।
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा देगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण तथा डिजिटल अवसंरचना को प्रोत्साहित करेगा।
- भारत में वैश्विक निवेश प्रबंधन परिचालन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन देगा।
- अवसंरचना एवं रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश बढ़ाएगा।
- उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।
चुनौतियाँ
- कर प्रोत्साहनों से अल्पकाल में सरकार के राजस्व में कमी आ सकती है।
- कर अपवंचन तथा राउंड-ट्रिपिंग को रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होगी।
- अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, अनुबंध प्रवर्तन तथा नियामकीय दक्षता में सीमित प्रगति प्रस्तावित कर सुधारों की प्रभावशीलता को कम कर सकती है।
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संक्षिप्त समाचार 04-08-2026